मंदिर में प्रसाद लेने के लिए लाइन ….

bachpan ki yaade

छोड़ आये उन कच्ची गलियों को जहाँ पुरे दिन खेल के शाम हुआ करती थी

और शाम के समय चारो तरफ रंगीन हवा चला करती थी

हर रोज शाम को घर के पास हनुमान मंदिर में सभी खेला करते थे

और मंदिर में प्रसाद लेने के लिए लाइन लगा करती थी

उस प्रसाद को भोले से चेहरे से लगा के खाने में कुछ अलग ही  दुआ कबूल होती थी

रात में दादी के पास हजार किस्सों वाली जुबानी किताब हुआ करती थी

मेरे गाँव ( लालगढ़ जाटान  )  में  तो जनाब खुशियों की चाबी मिला करती थी

:-  संदीप मारवाल

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